फ़ोन उठाने वाला कोई न हो तो मरीज़ दूसरे दवाखाने चला जाता है — क्योंकि तकलीफ़ आज की है, कल की नहीं. boliqAI रात को, छुट्टी के दिन और OPD चलते हुए भी उसी शांति से जवाब देता है, समय तय करता है, और तात्कालिक लगे तो आपको तुरंत बता देता है.
…और आपके फ़ोन पर तुरंत: 🏥 नई appointment — सुनील · गले में दर्द + बुख़ार · आज ६:०० PM
डॉक्टर अंदर, receptionist कतार संभाल रही — और बाहर से आने वाले कॉल-मैसेज वैसे ही पड़े रहते हैं.
समय क्या है, फ़ीस कितनी, रविवार को खुला है क्या, रिपोर्ट कब मिलेगी — ८०% पूछताछ इन्हीं पाँच सवालों की होती है.
रात ११ बजे आया मैसेज सुबह पढ़ा जाता है. तब तक वह मरीज़ दूसरे क्लिनिक पहुँच चुका होता है.
कौन, कब, किसलिए — यह लिखना रह जाता है और दिन गड़बड़ में निकल जाता है.
एक ही ढर्रे का बॉट सबके लिए नहीं चलता. इस एजंट के सवाल, शब्द और नोट्स क्लिनिक व दवाखाने के लिए अलग रखे हैं.
एकदम प्रश्नावली नहीं — बातों-बातों में, ग्राहक को पूछताछ जैसी लगे इस तरह. जितना पता चले उतना दर्ज करता है.
आपका आदमी जब फ़ोन उठाता है तब उसके हाथ में पूरी तस्वीर होती है — शुरू से शुरुआत नहीं करनी पड़ती.
अपने WhatsApp Business नंबर पर एजंट लगाकर देखिए. पसंद आए तो रखिए, न आए तो बंद कर दीजिए — करार नहीं, नोटिस नहीं.
आज ही शुरू करें → कीमत देखें — ₹३९९ सेनहीं, और यह जानबूझकर ऐसा रखा है. वह लक्षण सुनकर दर्ज करता है और मुलाक़ात का समय तय करता है. निदान और इलाज डॉक्टर का ही काम है — वहाँ वह कभी अपनी राय नहीं देता.
गंभीर लगने वाली पूछताछ वह 'तात्कालिक' कहकर अलग निकालता है और आपको तुरंत अलर्ट भेजता है, ताकि आदमी फ़ौरन बात कर सके.
हाँ. बातचीत और नंबर encrypted रखे जाते हैं, सिर्फ़ आपके क्लिनिक को आपके मरीज़ दिखते हैं, और भारत के DPDP कानून के अनुसार सब संभाला जाता है.
उसका काम कम करने के लिए. कतार सामने हो तब फ़ोन और WhatsApp दोनों संभालना मुमकिन नहीं; एजंट दूसरी तरफ़ संभालता है और तय appointments उसकी सूची में डाल देता है.
एक ही boliqAI — सवाल और नोट्स बस धंधे के हिसाब से बदलते हैं.